नई दिल्ली, 30 अप्रैल 2026
देश में बाघों के संरक्षण को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के पास साल 2020-21 के दौरान हुई बाघों की 88 मौतों की जांच अब तक लंबित (Pending) है। अब अथॉरिटी इन अनसुलझे मामलों को औपचारिक रूप से बंद करने की तैयारी कर रही है।
1. राज्यों की लापरवाही: रिपोर्ट नहीं तो केस बंद
NTCA ने जनवरी में राज्यों को एक पत्र लिखकर कड़ी चेतावनी दी थी। पत्र में स्पष्ट कहा गया था कि:
- यदि संबंधित राज्य बाघों की मौत के मामलों में पोस्टमार्टम, फोरेंसिक, हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट और कलर तस्वीरें उपलब्ध कराने में विफल रहते हैं, तो इन केसों को ‘अनिर्णीत’ मानकर बंद कर दिया जाएगा।
- दस्तावेजी साक्ष्यों के अभाव में बाघों की मौत के असली कारणों (जैसे शिकार या प्राकृतिक मृत्यु) का पता लगाना असंभव हो गया है।
2. मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे खराब स्थिति
आंकड़ों के अनुसार, बाघों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले राज्यों में ही सबसे ज्यादा पेंडेंसी है:
- मध्य प्रदेश: यहां सबसे ज्यादा 32 मामले लंबित हैं। इनमें बांधवगढ़, कान्हा और पन्ना जैसे हाई-प्रोफाइल टाइगर रिजर्व शामिल हैं।
- महाराष्ट्र: यहां 20 मामले लंबित हैं, जिनमें से कई मौतें सुरक्षित टाइगर रिजर्व के बाहर हुई हैं।
- छत्तीसगढ़: बस्तर और कवर्धा जैसे इलाकों में भी कई मामले अनसुलझे हैं।
3. ‘सुरक्षित’ पार्कों का भी बुरा हाल
यह समस्या केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के सबसे प्रमुख नेशनल पार्कों में भी यही स्थिति है:
- असम: काजीरंगा नेशनल पार्क में 2020 से 8 मामले लंबित हैं।
- अन्य: उत्तराखंड का कॉर्बेट, उत्तर प्रदेश का दुधवा व पीलीभीत, और कर्नाटक का नागरहोल भी उन क्षेत्रों में शामिल हैं जहां जांच बिना किसी निष्कर्ष के अटकी हुई है।
4. ‘जब्ती’ के बावजूद कार्रवाई नहीं
कई मामलों को ‘जब्ती’ (Seizure) के रूप में दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि शिकारियों से बाघ के अंग तो बरामद किए गए, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कानूनी और फोरेंसिक प्रक्रियाओं को पूरा नहीं किया गया, जिससे दोषियों को सजा मिलना मुश्किल हो गया है।
5. ‘एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा लॉन्ड्रिंग’ का आरोप
प्रसिद्ध वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इसे “एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा लॉन्ड्रिंग” करार देते हुए कहा:
“देरी के कारण मौत के वास्तविक कारण का कभी पता नहीं चल पाता, जिसका फायदा शिकारियों को मिलता है। इस तरह फाइलों को बंद करना जवाबदेही से बचने का एक तरीका है।”







