क्वाड 2.0: क्या ट्रंप प्रशासन की ‘उदासीनता’ और भारत की ‘अध्यक्षता’ के बीच फंसा है हिंद-प्रशांत का भविष्य?

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नई दिल्ली, 29 अप्रैल 2026

हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए बनाया गया चार देशों का शक्तिशाली समूह ‘क्वाड’ (QUAD) इस समय एक बड़े कूटनीतिक चौराहे पर खड़ा है। जहाँ एक ओर अमेरिकी विशेषज्ञों ने भारत को इस समूह की असली ‘धुरी’ बताया है, वहीं दूसरी ओर 2026 के लीडर्स समिट पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं।

1. बाइडन, मोदी और कर्ट कैंपबेल का खुलासा

अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट एम. कैंपबेल ने हाल ही में हडसन इंस्टीट्यूट में एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्वाड में ‘लीडर लेवल’ पर शामिल करने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन को एक घंटे से अधिक समय तक व्यक्तिगत रूप से संवाद करना पड़ा था। कैंपबेल के अनुसार, भारत ही वह शक्ति है जिसने पर्दे के पीछे से इस समूह को आकार देने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।

2. 2026 समिट पर ‘ट्रंप फैक्टर’ का साया?

क्वाड की अध्यक्षता इस समय भारत के पास है, लेकिन भविष्य को लेकर चुनौतियां कम नहीं हैं:

  • समिट में देरी: 2025 में प्रस्तावित लीडर्स समिट के नहीं हो पाने के बाद अब 2026 की बैठक पर भी संशय बना हुआ है।
  • अमेरिका की बदलती प्राथमिकताएं: राजनयिक हलकों में चर्चा है कि अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की इस बहुपक्षीय समूह में कम रुचि के कारण समिट टल सकती है।
  • आधिकारिक निमंत्रण: भारत ने अभी तक सदस्य देशों (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) को आधिकारिक निमंत्रण नहीं भेजा है, जो बैठक में देरी का संकेत है।

3. विदेश मंत्रियों की बैठक: भारत का ‘प्लान बी’

भले ही राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में देरी हो रही हो, लेकिन भारत इस मंच को ठंडा नहीं होने देना चाहता।

  • मई 2026 में बैठक: भारत अब मई के आसपास विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित करने की तैयारी कर रहा है।
  • जयशंकर का स्टैंड: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फरवरी 2026 में स्पष्ट किया था कि क्वाड कभी ‘कैंसिल’ नहीं हुआ है। विभिन्न स्तरों (Working Groups) पर सहयोग लगातार जारी है।

4. क्वाड: चीन का काउंटर या सिर्फ समुद्री सुरक्षा?

आधिकारिक तौर पर क्वाड का लक्ष्य ‘मुक्त और खुला इंडो-पैसिफिक’ सुनिश्चित करना है, लेकिन वैश्विक विशेषज्ञ इसे सीधे तौर पर चीन की सैन्य और आर्थिक आक्रामकता का जवाब मानते हैं।

  • महत्व: यह समूह खनिज आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), महत्वपूर्ण तकनीक और आपदा प्रबंधन जैसे बिलियन लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर काम कर रहा है।
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